पत्थलगांव में ‘लैंड स्कैम’ का बड़ा खुलासा: तहसीलदार की रिपोर्ट से मचा हड़कंप, करोड़ों की जमीन जांच के घेरे में
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पत्थलगांव | विशेष रिपोर्ट जशपुर
पत्थलगांव में जमीन के संदिग्ध हस्तांतरण और अवैध कब्जे का मामला अब बड़ा रूप ले चुका है। तहसीलदार कार्यालय द्वारा पुलिस विभाग को भेजी गई एक गोपनीय रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। शुरुआती शिकायत से शुरू हुई जांच अब एक कथित “लैंड नेटवर्क” तक पहुंचती दिखाई दे रही है।
मामले की शुरुआत ग्राम पालीडीह निवासी नरेश कुमार सिदार के खिलाफ दर्ज एक शिकायत से हुई, जिसमें भूमि हस्तांतरण में गड़बड़ी और संदिग्ध लेन-देन के आरोप लगाए गए थे। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (SDOP) ने राजस्व विभाग से संबंधित व्यक्ति की चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्यौरा मांगा।
29 अप्रैल 2026 को तहसीलदार पत्थलगांव द्वारा जारी रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जांच के दौरान पटवारी हल्का नंबर 06 और 09 के रिकॉर्ड खंगाले गए, जिसमें बड़ी मात्रा में जमीन विभिन्न नामों पर दर्ज पाई गई।
ग्राम पालीडीह में खसरा नंबर 100, 163/1, 163/2, 528, 554 और 561 के तहत कुल 3.149 हेक्टेयर (करीब 7.78 एकड़) भूमि दर्ज मिली है। यह जमीन आनंद कुमार, दीपचंद, नरेश कुमार सहित कई लोगों के नाम पर संयुक्त रूप से दर्ज बताई गई है।
वहीं ग्राम पत्थलगांव के शहरी क्षेत्र में भी पकड़ मजबूत दिखाई देती है। यहां 513/24, 513/72, 513/85 सहित कुल 10 अलग-अलग खसरा नंबरों में 0.672 हेक्टेयर जमीन दर्ज पाई गई है, जो व्यावसायिक और आवासीय दोनों श्रेणियों में आती है।
रिपोर्ट में सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बल्कि कई नाम सामने आए हैं, जिनमें आनंद कुमार, दीपचंद, जगजननी, बीससिंह, रोहित कुमार, नरेश कुमार, कमलेश कुमार और शैलेश कुमार शामिल हैं। प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि इन जमीनों का हस्तांतरण कहीं नियमों के विरुद्ध तो नहीं हुआ, क्या आदिवासी भूमि कानून (धारा 170-B) का उल्लंघन किया गया, या दस्तावेजों में किसी प्रकार की हेराफेरी की गई है।
तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट पुलिस को “अग्रिम एवं आवश्यक कार्रवाई” के लिए सौंप दी है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही इस मामले में FIR दर्ज हो सकती है, साथ ही संबंधित जमीनों की खरीदी-बिक्री पर रोक या अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित है या इसके पीछे जमीन के बड़े नेटवर्क की परतें छिपी हैं। जिस तरह से प्रशासन ने रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
फिलहाल, पत्थलगांव का यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन चुका है—और सभी की नजरें अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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