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तिल्दा-नेवरा में भ्रष्टाचार पर क्यों खामोश है सिस्टम?

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लगातार खबरें, लगातार आरोप… फिर भी कार्रवाई नहीं!
“डबल इंजन सरकार” में आखिर किसके संरक्षण में चल रहा पूरा खेल?

तिल्दा-नेवरा। नगर पालिका परिषद तिल्दा-नेवरा इन दिनों गंभीर आरोपों, कथित भ्रष्टाचार, अतिक्रमण, बाजार विवाद और योजनाओं में गड़बड़ी को लेकर लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल अब यह उठ रहा है कि लगातार खबरें प्रकाशित होने, शिकायतें सामने आने और जनता के विरोध के बावजूद आखिर शासन-प्रशासन कार्रवाई करने में नाकाम क्यों नजर आ रहा है?
शहर में इन दिनों यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि आखिर किसके संरक्षण में पूरा खेल संचालित हो रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर बुधवारी बाजार, अतिक्रमण और कथित वसूली तक कई मामलों में सवाल उठ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी अब लोगों के निशाने पर आ चुकी है।
जीरो टॉलरेंस” नीति आखिर गई कहां?

छत्तीसगढ़ सरकार लगातार “जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन” की बात करती रही है। मुख्यमंत्री स्तर से कई बार भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के दावे किए गए। कई जिलों में अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन तिल्दा-नेवरा के मामले में अब तक ठोस कदम नहीं उठने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि गरीब हितग्राहियों से कथित रूप से पैसे मांगने, बाजार में दबाव बनाने और अतिक्रमण जैसे आरोप सामने आ रहे हैं तो तत्काल जांच और कार्रवाई होनी चाहिए थी।
लेकिन अब तक केवल चर्चाएं, आरोप और बयानबाजी ही दिखाई दे रही है।
जॉन बनेगा डॉन” की चर्चा ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
तिल्दा-नेवरा में इन दिनों “जॉन बनेगा डॉन” नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। शहर के चौक-चौराहों से लेकर नगर पालिका कार्यालय तक यह नाम राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में गूंज रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कथित राजनीतिक संरक्षण के दम पर कुछ लोग खुद को व्यवस्था से ऊपर समझने लगे हैं।
नगर पालिका के भीतर “सेटिंग सिस्टम” चलने, फाइलें रोकने और कथित प्रभाव दिखाने की बातें अब खुलकर सामने आने लगी हैं।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि सब कुछ गलत नहीं है, तो फिर जांच से डर किस बात का है?
प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों के नाम पर खेल?
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना में हितग्राहियों से कथित रूप से ₹30 हजार तक मांगने की चर्चाओं ने माहौल और गरमा दिया है। गरीब परिवारों का कहना है कि सरकार ने जिन योजनाओं को गरीबों के सपनों से जोड़ा, वही योजनाएं अब कथित बिचौलियों और रसूखदारों के कब्जे में नजर आ रही हैं।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए — यही जनता की मांग है।
बुधवारी बाजार में ₹50 लाख की चर्चा से व्यापारी नाराज
बुधवारी बाजार के व्यापारियों के बीच भी भारी असंतोष दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार बाजार व्यवस्था को लेकर कथित रूप से ₹50 लाख मांगने की चर्चाएं सामने आई हैं।
बताया जा रहा है कि मामला कानूनी स्तर तक पहुंच चुका है और व्यापारियों में भारी नाराजगी है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि इसी तरह दबाव और विवाद का माहौल बना रहा तो बाजार व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
लगातार खबरें प्रकाशित होने और शहर में माहौल गरमाने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई बड़ा आधिकारिक बयान या सख्त कार्रवाई सामने नहीं आई है। यही वजह है कि अब लोग सीधे शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे हैं।
शहर में चर्चा है कि क्या तिल्दा-नेवरा में “डबल इंजन सरकार” की जीरो टॉलरेंस नीति सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गई है?
क्या रसूखदार लोगों पर कार्रवाई करने से सिस्टम पीछे हट रहा है?
और आखिर किसके संरक्षण में पूरा खेल संचालित हो रहा है?
जनता की मांग — “अब सिर्फ जांच नहीं, कार्रवाई चाहिए”
स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि, कर्मचारी, बिचौलिये या कथित दबंग की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

अब शहर में एक ही सवाल गूंज रहा है —

क्या तिल्दा-नेवरा में भी चलेगा बुलडोजर ऑफ एक्शन?”

या फिर भ्रष्टाचार और दबंगई पर सिस्टम की चुप्पी जारी रहेगी?”

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