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मूलनिवासी संघ का बड़ा ऐलान : अत्याचार और काला कानून के खिलाफ छत्तीसगढ़ में होगा बड़ा आंदोलन

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रायपुर। मूलनिवासी संघ छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदेश एवं 10 जिलों के जिला पदाधिकारियों का विशाल प्रशिक्षण कैंप सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। राजधानी रायपुर स्थित YMCA हॉल में आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम मूलनिवासी संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत पटेल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया, जहां सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकार और विभिन्न समाजों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
प्रशिक्षण शिविर में प्रदेशभर से पहुंचे पदाधिकारियों ने एकजुट होकर सामाजिक अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत आंदोलन खड़ा करने का संकल्प लिया। बैठक में आदिवासी समाज, सतनामी समाज और मसीही समाज से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाया गया। संगठन के नेताओं ने कहा कि प्रदेश में लगातार बढ़ रही हिंसा, भेदभाव और कथित गैर-संवैधानिक कानूनों के खिलाफ अब व्यापक जनआंदोलन की जरूरत है।
प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि मूलनिवासी समाज को अब संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, लेकिन आज कई समाज अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों से गांव-गांव तक जाकर लोगों को जागरूक करने और सामाजिक एकता को मजबूत करने की अपील की।
बैठक में विशेष रूप से धर्मांतरण बिल को लेकर चर्चा हुई। संगठन के नेताओं ने इसे मसीही समाज के लिए “काला कानून” बताते हुए कहा कि इससे समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण बन रहा है। इस कानून के खिलाफ संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने की रणनीति तैयार की गई। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि आने वाले समय में प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
प्रशिक्षण कैंप में तीन प्रमुख मुद्दों पर विशेष रणनीति बनाई गई —
आदिवासी समाज पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आंदोलन
बैठक में कहा गया कि प्रदेश में आदिवासी समाज लगातार अन्याय और शोषण का सामना कर रहा है। मूलनिवासी संघ ने ऐसे मामलों के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी शुरू करने का निर्णय लिया।
मसीही समाज पर हिंसा और कथित गैर-संवैधानिक कानूनों का विरोध
संगठन ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है और किसी भी समाज के साथ भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। मसीही समाज पर हो रही हिंसा को रोकने और कानून के विरोध में विशेष प्लानिंग तैयार की गई।
सतनामी society पर बढ़ती हिंसा रोकने की मांग
बैठक में सतनामी समाज पर हो रही घटनाओं को गंभीर बताते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि हिंसा नहीं रुकी तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
इसके अलावा संगठन विस्तार, युवा नेतृत्व निर्माण, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति और सोशल मीडिया के माध्यम से समाज को जोड़ने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने सामाजिक न्याय, समानता और संविधान की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में “जय भीम” और “जय मूलनिवासी” के नारों से पूरा सभागार गूंज उठा। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर समाज के अधिकारों की लड़ाई को और मजबूत करने का संकल्प लिया।

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