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मनरेगा में फर्जी हाजरी का बड़ा खेल? आमापारा पंचायत में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

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जिला पंचायत अध्यक्ष के निजी ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

कोरिया बैकुंठपुर क्षेत्र के समीप ग्राम पंचायत आमापारा में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत तालाब निर्माण कार्य में बड़े भ्रष्टाचार और फर्जी मजदूरी हाजरी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कार्य स्थल पर वास्तविक मजदूरों की संख्या कम होने के बावजूद ऑनलाइन डिजिटल हाजरी में भारी संख्या दिखाकर शासन की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि ग्राम पंचायत आमापारा को जिला पंचायत अध्यक्ष मोहित राम पैकरा का निजी ग्राम पंचायत बताया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इतने बड़े जनप्रतिनिधि के क्षेत्र में खुलेआम फर्जी हाजरी और मनरेगा राशि के दुरुपयोग का खेल चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार तालाब निर्माण स्थल पर प्रतिदिन मजदूरों की उपस्थिति का कोई निश्चित समय नहीं रहता। कभी सुबह, कभी दोपहर और कभी शाम को अलग-अलग समय पर हाजरी ली जाती है। आरोप है कि इसी अव्यवस्था का फायदा उठाकर कई बार फर्जी डिजिटल उपस्थिति दर्ज की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर वास्तविक रूप से मात्र 15 से 35 मजदूर ही कार्य करते दिखाई देते हैं, जबकि मस्टर रोल में इससे कहीं अधिक संख्या दर्ज कर लाखों रुपए का भुगतान निकाला जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक करचा डांड और आमापारा क्षेत्र में कई ऐसे नाम दर्ज किए जा रहे हैं जो बिना कार्य किए ही घर बैठे मजदूरी का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एक सप्ताह में लगभग 94 हजार से 1 लाख रुपए तक की राशि मस्टर रोल के माध्यम से निकाली जा रही है, जबकि वर्तमान मजदूरी दर लगभग 261 रुपए प्रतिदिन है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर वास्तविक मजदूरों की संख्या कम होने के बावजूद इतना बड़ा भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि ऑनलाइन डिजिटल हाजरी लेने की जिम्मेदारी रोजगार सहायक और मेट-मुंशी की होती है, न कि सरपंच, सचिव या तकनीकी सहायक की। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि यदि फर्जी हाजरी और भुगतान का खेल चल रहा है तो इसकी मुख्य जिम्मेदारी रोजगार सहायक और मेट-मुंशी पर बनती है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन्हीं के माध्यम से पूरे भ्रष्टाचार का संचालन किया जा रहा है और शासन की राशि का दुरुपयोग हो रहा है।
इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने रोजगार सहायक पूर्णिमा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि मामले की जानकारी लेने के लिए फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, इस विषय में तथ्य जानने और पक्ष लेने के लिए आजाद हिंद लाइव 24 के संपादक कृष्णकुमार वैष्णव द्वारा भी रोजगार सहायक को फोन किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं किया गया। इससे ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर रोजगार सहायक और मेट-मुंशी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने की कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक ऐसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक पंचायत भ्रष्टाचार मुक्त नहीं हो पाएगी।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और मनरेगा विभाग से मांग की है कि तालाब निर्माण कार्य के मस्टर रोल, डिजिटल हाजरी और भुगतान की विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही कार्य स्थल पर अचानक निरीक्षण कर वास्तविक मजदूरों की संख्या की पुष्टि की जाए ताकि मजदूरों के हक की राशि बचाई जा सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला मनरेगा योजना में बड़े भ्रष्टाचार के रूप में सामने आ सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन मजदूरों के हक और शासन की राशि की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

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