पेट्रोल में 30% एथेनॉल का रास्ता साफ! केंद्र सरकार ने टैक्स माफ कर शुरू की ईंधन क्रांति
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E22, E25, E27 और E30 ईंधन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क शून्य, वित्त मंत्रालय की अधिसूचना जारी
नई दिल्ली/विशेष रिपोर्ट।
भारत में हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भर ईंधन नीति को नई दिशा देते हुए केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को बड़ी कर राहत प्रदान की है। वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक 26/2026-Central Excise के तहत 22%, 25%, 27% और 30% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
10 जून 2026 को जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानक IS 19850 के अनुरूप तैयार किए गए E22, E25, E27 और E30 ईंधनों पर उत्पाद शुल्क की दर “Nil” (शून्य) होगी। इस फैसले को देश की ऊर्जा नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है नया प्रावधान?
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार—
🔹 E22 – 78% पेट्रोल और 22% एथेनॉल
🔹 E25 – 75% पेट्रोल और 25% एथेनॉल
🔹 E27 – 73% पेट्रोल और 27% एथेनॉल
🔹 E30 – 70% पेट्रोल और 30% एथेनॉल
इन सभी मिश्रित ईंधनों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क शून्य रहेगा, बशर्ते वे निर्धारित BIS मानकों का पालन करते हों।
भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव
भारत लंबे समय से कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहा है। हर साल लाखों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में खर्च होती है। ऐसे में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देना केंद्र सरकार की प्राथमिकता बन चुका है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ती है तो देश की विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयात बिल में भी कमी आएगी।
किसानों के लिए खुशखबरी
सरकार के इस फैसले का सीधा लाभ किसानों को मिलने की उम्मीद है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है।
एथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों की उपज की मांग बढ़ेगी, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और चीनी मिलों को मजबूती मिलेगी।
क्या सस्ता होगा पेट्रोल?
हालांकि केंद्र सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क समाप्त कर दिया है, लेकिन आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल तुरंत सस्ता होगा या नहीं, इस पर अभी स्पष्ट स्थिति नहीं है।
पेट्रोल की खुदरा कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम, राज्य सरकारों के वैट, परिवहन लागत और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर भी निर्भर करती हैं। फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में एथेनॉल आधारित ईंधन देश की ऊर्जा लागत को कम करने में सहायक साबित हो सकता है।
वाहन मालिकों की बढ़ी चिंता
जहां सरकार इस फैसले को हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं वाहन मालिकों के बीच कुछ सवाल भी उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल मिश्रण से प्रदूषण कम होगा और ऑक्टेन रेटिंग बेहतर होगी, लेकिन पुराने वाहनों में माइलेज घटने और कुछ तकनीकी चुनौतियों की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
ईंधन क्रांति की ओर भारत
पेट्रोल में 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण को कर मुक्त कर केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि देश अब पारंपरिक ईंधन व्यवस्था से आगे बढ़कर वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
यह फैसला केवल कर छूट तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, हरित ऊर्जा और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में इसका असर देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र में साफ दिखाई दे सकता है।
बड़ी बात
भारत अब पेट्रोल आधारित अर्थव्यवस्था से धीरे-धीरे जैव ईंधन आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। E30 को मिली कर छूट इस बात का संकेत है कि भविष्य का ईंधन अधिक स्वदेशी, पर्यावरण अनुकूल और किसानों से जुड़ा होगा। अब देखना यह होगा कि यह बदलाव आम उपभोक्ता के लिए कितना फायदेमंद साबित होता है।
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