सरगुजा में सत्ता का ‘दबंग चेहरा’ या प्रशासनिक लापरवाही पर गुस्सा? भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो पर नायब तहसीलदार से मारपीट का आरोप, कर्मचारी-अधिकारी संघ ने दी आर-पार की चेतावनी
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अगर अधिकारी काम में लापरवाही कर रहे थे तो निलंबन कराइए… लेकिन सरकारी दफ्तर में घुसकर मारपीट क्यों?”
अंबिकापुर/सरगुजा।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से सामने आया राजापुर उप-तहसील कार्यालय का मामला अब केवल एक विवाद नहीं, बल्कि सत्ता बनाम प्रशासन की बड़ी लड़ाई बनता जा रहा है। सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर नायब तहसीलदार तुषार मणिकपुरी के साथ कथित मारपीट, गाली-गलौज और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
घटना के बाद पूरा प्रशासनिक अमला आक्रोश में है। कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है और साफ चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे जिले में कर्मचारी और अधिकारी सामूहिक हड़ताल पर उतर सकते हैं।
क्या सत्ता के दम पर कानून हाथ में लिया गया?
सबसे बड़ा सवाल अब यही उठ रहा है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा कार्य में लापरवाही की जा रही थी, तो उसके खिलाफ शिकायत, विभागीय जांच या निलंबन जैसी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती थी।
लेकिन क्या किसी जनप्रतिनिधि को सरकारी कार्यालय में घुसकर अधिकारियों के साथ मारपीट करने का अधिकार है?
क्या लोकतंत्र में अब कानून से ऊपर सत्ता खड़ी हो गई है?
और अगर अधिकारी ही दफ्तर में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की क्या गारंटी है?
SDM की पुष्टि ने बढ़ाई मामले की गंभीरता
मामला तब और गरमा गया जब सीतापुर SDM फागेश सिन्हा ने भी घटना की पुष्टि कर दी। जानकारी के मुताबिक मौके पर 30-40 समर्थक मौजूद थे और बातचीत के दौरान विवाद हिंसक रूप ले बैठा।
सूत्रों के अनुसार नायब तहसीलदार के कपड़े तक फट गए और उन्हें भारी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। घटना के बाद वे सीधे अंबिकापुर कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंप दी।
कर्मचारी संघ का अल्टीमेटम — “अब चुप नहीं बैठेंगे”
छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ, जिला सरगुजा ने इस घटना को पूरे प्रशासनिक तंत्र का अपमान बताया है। संघ ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट लिखा है कि यदि दोषियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो अधिकारी-कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे।
ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, राजस्व मंत्री, कमिश्नर, आईजी और एसपी तक भेजी गई है।
“सुशासन” बनाम “सत्ता का दबाव” ?
राज्य सरकार लगातार “सुशासन” और “जीरो टॉलरेंस” की बात करती है, लेकिन अब विपक्ष और कर्मचारी संगठन सवाल उठा रहे हैं कि —
यदि सत्ता पक्ष के विधायक पर ही मारपीट जैसे आरोप लग रहे हैं, तो क्या सरकार निष्पक्ष कार्रवाई कर पाएगी?
क्या प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल टूटेगा?
या फिर यह मामला भी राजनीतिक दबाव में दबा दिया जाएगा?
सरगुजा में उबाल, राजनीति में भूचाल
इस घटना के बाद सरगुजा से लेकर रायपुर तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी है, जबकि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय यही बना हुआ है कि —
*“अगर गलती थी तो कार्रवाई होती…
लेकिन दफ्तर में घुसकर मारपीट क्यों?”*
अब सबकी नजर शासन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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