प्रेस की आज़ादी पर बढ़ते सवाल, भारत 157वें स्थान पर नार्वे में महिला पत्रकार के सवाल पर घिरे प्रधानमंत्री, पत्रकार सुरक्षा को लेकर देशभर में बहस तेज
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रायपुर/नई दिल्ली। Azad hind live24
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले मीडिया और पत्रकारिता को लेकर देश में गंभीर बहस छिड़ गई है। अंतरराष्ट्रीय प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत का 157वें स्थान पर पहुंचना अब केवल आंकड़ा नहीं बल्कि लोकतंत्र की स्थिति पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि देश में लगातार पत्रकारों पर दबाव, धमकी, झूठे मुकदमे और हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता प्रभावित हो रही है।
इसी बीच विदेश दौरे के दौरान नार्वे में एक महिला पत्रकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेस स्वतंत्रता और पत्रकार सुरक्षा को लेकर पूछे गए सवाल ने राजनीतिक और मीडिया जगत में नई बहस खड़ी कर दी है। महिला पत्रकार ने भारत में गिरती प्रेस स्वतंत्रता, पत्रकारों पर कार्रवाई और मीडिया पर बढ़ते दबाव को लेकर सवाल पूछा, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस विषय पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया।
“क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना गलत है?”
पत्रकार संगठनों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं बल्कि पत्रकारिता की मूल जिम्मेदारी है। यदि पत्रकार सवाल पूछने से डरने लगें तो जनता तक सच्चाई पहुंचना बंद हो जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में प्रेस की स्वतंत्रता मजबूत होना जरूरी है। लेकिन आज कई पत्रकारों को खबर दिखाने या भ्रष्टाचार उजागर करने पर दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
छोटे शहरों के पत्रकार सबसे ज्यादा प्रभावित
ग्रामीण और छोटे शहरों में कार्यरत पत्रकारों की स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है। कई मामलों में स्थानीय स्तर पर पत्रकारों को झूठे मामलों में फंसाने, विज्ञापन बंद कराने, खबर हटाने और शारीरिक हमले तक की शिकायतें सामने आती रही हैं।
पत्रकार संगठनों का कहना है कि जमीनी पत्रकार ही जनता की असली समस्याएं सामने लाते हैं, लेकिन वही सबसे ज्यादा असुरक्षित भी हैं।
छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
इन्हीं मुद्दों को लेकर इंडियन जनलिस्ट एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन सौंपा। प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर राजेंद्र जैन के नेतृत्व में सौंपे गए
ज्ञापन में पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर 10 बड़ी मांगें रखी गईं।
ज्ञापन में कहा गया कि—
पत्रकारों पर कार्रवाई से पहले स्वतंत्र जांच हो
हर जिले में पत्रकार सुरक्षा समिति बने
महिला पत्रकारों के लिए विशेष सुरक्षा प्रकोष्ठ बने
पत्रकारों पर हमला करने वालों पर कठोर कार्रवाई हो
फास्ट ट्रैक कोर्ट में पत्रकार उत्पीड़न मामलों की सुनवाई हो
घायल अथवा मृत पत्रकारों के परिवार को आर्थिक सहायता मिले
“पत्रकार संरक्षण कोष” बनाया जाए
महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता
ज्ञापन में महिला पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष मांग रखी गई। संगठन ने कहा कि कई महिला पत्रकारों को ऑनलाइन ट्रोलिंग, धमकी और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई के लिए अलग सेल बनाया जाना जरूरी है।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र मीडिया जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि जब मीडिया स्वतंत्र रहता है तभी सरकारों की जवाबदेही तय होती है। प्रेस की स्वतंत्रता कमजोर होने का सीधा असर लोकतंत्र और जनता के अधिकारों पर पड़ता है।
आजाद हिंद लाइव 24 से बातचीत में कई पत्रकारों ने कहा कि देश में पत्रकारों को सुरक्षा और सम्मान देने के लिए ठोस कानून और मजबूत व्यवस्था बनाने की जरूरत है।
संघर्ष जारी रहेगा
इंडियन जनलिस्ट एसोसिएशन ने स्पष्ट कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा। संगठन ने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय को गंभीरता से लेते हुए पत्रकार हित में प्रभावी कदम उठाएगी।
“पत्रकार की आवाज दबेगी, तो जनता की आवाज भी दब जाएगी।”
आजाद हिंद लाइव 24
सच्चाई के साथ, जनता की आवाज
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