देश की बहस: पत्रकार सुरक्षित नहीं तो लोकतंत्र कितना सुरक्षित?
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सारंगढ़-बिलाईगढ़ (छत्तीसगढ़) | विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से आई एक घटना ने पूरे प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। आरोप है कि एक युवा पत्रकार के साथ सिर्फ सवाल पूछने पर कथित तौर पर मारपीट की गई। यह मामला अब केवल एक घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती पर सीधा सवाल बन चुका है।
मिली जानकारी के अनुसार, पत्रकार पोषराम साहू प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े मुद्दों पर जानकारी लेने एक कृषि विस्तार अधिकारी के पास पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बातचीत के दौरान अधिकारी सवालों से असहज हो गए और विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इसी दौरान पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट की गई।
स्थिति तब और बिगड़ी जब मौके पर मौजूद एक वकील ने बीच-बचाव करने की कोशिश की। आरोप है कि उनके साथ भी हाथापाई की गई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और घटना ने तूल पकड़ लिया।
इस घटना के बाद स्थानीय पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि अगर पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो आम जनता की आवाज कौन उठाएगा? वहीं सामाजिक संगठनों और विपक्ष ने भी मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है—क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला दब जाएगा?
🎯 बड़ा सवाल
क्या देश में पत्रकार अब सुरक्षित हैं?
क्या सच पूछना अब खतरे से खाली नहीं रहा?
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