प्रशासन का बढ़ावा, कागजी कार्यालय छलावा
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बड़गांव/बैकुंठपुर | विशेष रिपोर्ट | Azad Hind Live24
कोरिया/ बड़गांव क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजस्व मंडल बड़गांव, जिसे ग्रामीणों और किसानों की सुविधा के लिए स्थापित किया गया था, आज सिर्फ कागजों में सीमित कार्यालय बनकर रह गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यालय बनने के बाद से पिछले लगभग 3 वर्षों में आज तक राजस्व निरीक्षक (RI) एक बार भी कार्यालय नहीं आए हैं। यह स्थिति बताती है कि यह कार्यालय केवल नाम के लिए राजस्व मंडल बनाकर छोड़ दिया गया है, जिससे क्षेत्र के कई ग्राम पंचायतों के किसानों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, फौती, ऋण पुस्तिका सुधार, नक्शा-खसरा, भूमि विवाद और शासकीय भूमि से जुड़े कार्यों के लिए किसान करीब 15 किलोमीटर दूर से बड़गांव राजस्व मंडल पहुंचते हैं, लेकिन कार्यालय में अधिकारी नहीं मिलने से उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है।
स्थिति इतनी खराब है कि लोगों को पहले की तरह बैकुंठपुर मुख्यालय तक जाना पड़ रहा है, जहां तहसील कार्यालय से लेकर कई बार राजस्व निरीक्षक के घर तक पहुंचकर अपना कार्य करवाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अधिकारी को बड़गांव में बैठना ही नहीं था, तो आखिर इस क्षेत्र को राजस्व मंडल का दर्जा देने का उद्देश्य क्या था।
सबसे गंभीर मुद्दा यह है राजस्व मंडल बड़गांव की शासकीय राजस्व भूमि पर अतिक्रमण जोरों पर बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार सरकारी भूमि पर लगातार कब्जे बढ़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही। इससे ग्रामीणों में यह आशंका बढ़ गई है कि जब राजस्व मंडल की अपनी सरकारी जमीन सुरक्षित नहीं है, तो अन्य ग्राम पंचायतों की जमीनों का क्या हाल होगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि यह केवल “उपलब्धि दिखाने की कागजी कवायद” बनकर रह गया है। शासन ने बड़गांव को राजस्व मंडल का नाम देकर सुविधा का दावा तो किया, लेकिन जमीन पर न तो अधिकारी बैठ रहे हैं और न ही जनता को राहत मिल रही है।
अब क्षेत्र में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या यही है प्रशासन को राजस्व मंडल का नाम देने का बढ़ावा कार्यालय राजस्व मंडल बडगांव बना है, लेकिन काम के नाम पर जनता को भटकना पड़ रहा है?
स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों ने मांग की है कि राजस्व निरीक्षक की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, शासकीय भूमि पर हो रहे अतिक्रमण की तत्काल जांच हो, और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अन्यथा ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन तक सामूहिक शिकायत करने की चेतावनी दी है।
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